सेरेना विलियम्स लौट आई हैं। 1,375 दिन के ब्रेक के बाद 44 की उम्र में वे प्रोफेशनल टूर पर लौटीं और क्वींस क्लब टूर्नामेंट में जीते डबल्स खिताब की बदौलत रैंकिंग में 9,407 पायदान चढ़कर 592वें नंबर पर पहुंच गईं। हालांकि बड़े मंच पर वापसी कभी आसान होने वाली नहीं थी। विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर वे 20 साल की ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी माया जॉइंट से तीन सेट में हार गईं। उनकी सर्विस अब भी 120 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पड़ रही थी। बाकी काम उम्र और चार साल के ब्रेक ने कर दिया।

बचपन में उन्हें कोचिंग देने वाले रिक मैकी को ज्यादा भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, "क्या सेरेना विंबलडन जीत सकती हैं? नहीं। क्या वे टॉप-10 खिलाड़ियों को हरा सकती हैं? हां।" विलियम्स का नजरिया अलग है। उन्होंने जोर देकर कहा, "मुझे कुछ साबित नहीं करना है। मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है।" उनकी कहानी में भी एकरूपता नहीं रही है। कुछ समय पहले तक वे सोशल मीडिया पर वापसी की संभावना को साफ तौर पर खारिज कर रही थीं, जबकि अब उनके TikTok पर माहौल बिल्कुल अलग है। उन्होंने लिखा, "लगता है मेरा घुटना आखिरकार ठीक हो रहा है। आखिरकार!"

आखिरकार यह जंग बायोलॉजी से है। 40 के पार एथलीट के शरीर को बिल्कुल अलग तरीके की जरूरत होती है, जिसमें रिकवरी और नींद की क्वालिटी उतनी ही अहम है जितना कोर्ट पर किया गया कोई भी काम। विलियम्स के लिए यह कभी सिर्फ टेनिस की बात नहीं थी। वे कोर्ट पर इसलिए उतरीं ताकि उनके बच्चे उन्हें खेलते हुए देख सकें। घुटने की वजह से उन्हें विंबलडन डबल्स से हटना पड़ा, फिर भी उनकी नजर अभी से 2026 यूएस ओपन पर है। यह दिग्गज अभी थमी नहीं है और कोर्ट पर उनका सफर जारी है
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