वर्ल्ड कप के इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि नॉकआउट मुकाबले में कोई टीम 75वें मिनट तक दो गोल से पिछड़ रही हो और 90 मिनट के भीतर मैच जीत ले। अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में यह इतिहास बदल गया — और गत चैंपियन अर्जेंटीना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हार मान लेना उसकी फितरत में ही नहीं है। लगभग पूरी शाम ऐसा लग रहा था कि 39 साल के लियोनेल मेसी का छठा वर्ल्ड कप दर्दनाक हार के साथ खत्म होने जा रहा है। पहली बार राउंड ऑफ 16 में पहुंचे मिस्र ने यासिर इब्राहिम और मुस्तफा ज़िको के गोलों की बदौलत दमदार बढ़त बनाई थी, और वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) ने एक गोल रद्द न किया होता तो स्कोर 3-0 भी हो सकता था। तस्वीर इतनी निराशाजनक थी कि खुद मेसी पहले हाफ में पेनल्टी चूक गए — वर्ल्ड कप करियर में आठ में से यह उनकी चौथी चूक थी।

फिर आखिरी दस मिनट में, जब अर्जेंटीना का सपना दफन होता दिख रहा था, मैदान पर तूफान आ गया। 79वें मिनट में क्रिस्टियन रोमेरो के सटीक हेडर ने चिंगारी लगाई और महज चार मिनट बाद मेसी ने ऐतिहासिक गोल दाग दिया — इस टूर्नामेंट में उनका आठवां और वर्ल्ड कप करियर का 21वां गोल। बेमिसाल कप्तान ने इसी के साथ एक और रिकॉर्ड बनाया और लगातार छठे नॉकआउट मैच में गोल किया। बराबरी का गोल होते ही वर्ल्ड चैंपियंस खेमे में अविश्वास भरे जश्न का माहौल बन गया, और स्टॉपेज टाइम में एंजो फर्नांडेज ने विजयी गोल दागकर वापसी पर मुहर लगा दी। फर्नांडेज ने बाद में कहा, "हमारा ग्रुप शानदार है, ऐसा ग्रुप जो मुश्किलों और विपरीत हालात में भी कभी हार नहीं मानता — हम हमेशा साथ रहते हैं।"
लेकिन मैदान की खुशी के उलट मिस्र के खेमे में मायूसी छाई रही। मैनेजर होसाम हसन ने साफ शब्दों में कहा, "आज हमारे साथ नाइंसाफी हुई है। हमारे साथ अन्याय हुआ है।" वे इतने टूट गए कि उन्होंने टूर्नामेंट का कोई और मैच न देखने की कसम खा ली और कहा कि फाइनल स्कोर को छोड़कर बाकी हर मामले में उनकी टीम गत चैंपियन से बेहतर थी। इस माहौल में आंसुओं में डूबे मेसी और भावुक लियोनेल स्कालोनी की नजरें अब अगले प्रतिद्वंद्वी पर हैं — स्विट्जरलैंड या कोलंबिया। क्या यह जज्बा अर्जेंटीना को 1962 के बाद खिताब बरकरार रखने वाली पहली टीम बना पाएगा, या मिस्र के खिलाफ यह ड्रामा मेसी के आखिरी डांस में सिर्फ फांसी टलने जैसा था?
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