FIA ने फॉर्मूला 1 के 2026 नियमों में बदलाव के एक पैकेज पर सहमति जता दी है, जो 1 से 3 मई को होने वाले मायामी ग्रां प्री से लागू होगा (वर्ल्ड मोटर स्पोर्ट काउंसिल की अंतिम मंजूरी बाकी है, जिसे औपचारिकता माना जा रहा है)। इसके दो मुख्य मकसद हैं: ड्राइवरों की सुरक्षा बेहतर करना और "फ्लैट-आउट ड्राइविंग" को बढ़ावा देना।

क्यों बदल रहे हैं नियम
2026 के नियमों को F1 के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नए पावर यूनिट में इलेक्ट्रिकल और कंबशन पावर का बंटवारा 50/50 है और इनके साथ नए चेसिस भी आए हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान की सिर्फ तीन रेस के बाद ही दिक्कतें साफ दिखने लगीं।
प्रायोजितक्वालिफाइंग में ड्राइवरों को फ्लैट आउट चलाने के बजाय एनर्जी बचाने के लिए थ्रॉटल से पैर हटाकर कोस्ट करना पड़ा। नए नियमों से "सुपरक्लिपिंग" नाम की समस्या भी आई, जिसमें थ्रॉटल पूरा दबा होने के बावजूद कार की टॉप स्पीड अचानक घट जाती है, क्योंकि इंजन बैटरी रिचार्ज करने के लिए पावर मोड़ देता है। नतीजा यह कि ड्राइवर पूरी रफ्तार मांगता रहता है और कार धीमी पड़ जाती है। ऐसी रेसिंग को ड्राइवर और फैंस दोनों के लिए पहचानना मुश्किल हो गया।
कैलेंडर ने भी भूमिका निभाई। मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण बहरीन और सऊदी अरब ग्रां प्री रद्द हो गए, जिससे जापान (29 मार्च) और मायामी (1-3 मई) के बीच लंबा अंतराल बन गया। इसी अंतराल ने FIA, टीमों और इंजन निर्माताओं को सीजन के बीच में नियम नए सिरे से तैयार करने का मौका दिया।

बेयरमैन का क्रैश और सुरक्षा का संकट
निर्णायक मोड़ 29 मार्च 2026 को जापानी ग्रां प्री में आया।
सुजुका के स्पून कर्व पर 22वें लैप में हास के ओलिवर बेयरमैन फुल थ्रॉटल पर फ्रांको कोलापिंटो की अल्पाइन के करीब पहुंचे। कोलापिंटो एनर्जी हार्वेस्टिंग मोड में थे और असल में सिर्फ इंटरनल कंबशन इंजन के भरोसे चल रहे थे। बेयरमैन के साथ ऐसा नहीं था। पलक झपकते ही दोनों के बीच रफ्तार का अंतर 45-50 किमी/घंटा हो गया।
308 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रहे बेयरमैन ने बचने की कोशिश की, लेकिन घास पर पहुंच गए, कार से नियंत्रण खो बैठे और 50G के असर के साथ बैरियर से जा टकराए। उन्हें सिर्फ घुटने में चोट आई और वे खुद चलकर बाहर निकले, लेकिन संदेश साफ था। मैकलारेन के टीम प्रिंसिपल एंड्रिया स्टेला ने बहरीन में प्री-सीजन टेस्टिंग के दौरान ही क्लोजिंग-स्पीड के खतरों को लेकर चेताया था।

वर्स्टैपेन की धमकी, नॉरिस की निराशा, हैमिल्टन की खुशी
नए नियमों पर ड्राइवरों की राय बंटी हुई है।
चार बार के चैंपियन मैक्स वर्स्टैपेन सबसे मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने कारों को "एंटी-रेसिंग" कहा, नए फॉर्मेट की तुलना मारियो कार्ट से की और इसे "स्टेरॉयड पर फॉर्मूला E" बताया। वर्स्टैपेन ने तो यह तक कहा है कि वे खेल को पूरी तरह छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन लैंडो नॉरिस ने कहा कि ये कारें "वैसी नहीं हैं, जिन्हें चलाने का सपना वे और उनके साथी फॉर्मूला 1 में पहुंचने से पहले देखते थे।"
वहीं सात बार के चैंपियन लुईस हैमिल्टन ने कहा कि F1 में उन्हें रेसिंग में पहले कभी इतना मजा नहीं आया।
FIA ने दोनों खेमों की सुनी, साथ ही GPDA की भी, जिसमें ड्राइवरों और FIA की बैठकों में विलियम्स के कार्लोस साइंज ने अहम भूमिका निभाई।
क्वालिफाइंग में क्या बदलेगा
* अधिकतम अनुमति प्राप्त रिचार्ज 8MJ से घटाकर 7MJ किया गया, यानी ड्राइवर हार्वेस्टिंग में कम और फुल थ्रॉटल पर ज्यादा वक्त बिताएंगे। लक्ष्य: प्रति लैप सुपरक्लिप की अधिकतम अवधि घटाकर करीब 2-4 सेकंड करना।
* सुपरक्लिप की पीक पावर 250kW से बढ़ाकर 350kW की गई, यानी रिचार्जिंग तेज होगी और सुपरक्लिप में कम समय लगेगा। (यह बदलाव रेस की स्थितियों में भी लागू होगा।)
* कम एनर्जी लिमिट वाले इवेंट 8 से बढ़ाकर 12 रेस कर दिए गए, यानी FIA अब आधे कैलेंडर के लिए सर्किट की खासियत के हिसाब से रिचार्ज लिमिट तय कर सकेगी।
रेसिंग में क्या बदलेगा
* रेस की स्थितियों में बूस्ट +150kW पर सीमित (या एक्टिवेशन के वक्त कार का मौजूदा पावर लेवल, अगर वह ज्यादा हो) ताकि कारों के बीच अचानक परफॉर्मेंस का फर्क न बने।
* MGU-K डिप्लॉयमेंट प्रमुख एक्सेलेरेशन जोन (कॉर्नर एग्जिट से ब्रेकिंग पॉइंट तक, ओवरटेकिंग जोन समेत) में 350kW पर बरकरार रहेगा, लेकिन लैप के बाकी हिस्सों में 250kW तक सीमित रहेगा। मकसद: ओवरटेकिंग के मौके बनाए रखना और खतरनाक क्लोजिंग स्पीड घटाना, ठीक वैसी जिसने बेयरमैन को बैरियर में पहुंचा दिया।
नया स्टार्ट सिस्टम
मायामी में नए "लो पावर स्टार्ट डिटेक्शन" सिस्टम का ट्रायल होगा। अगर क्लच छोड़ने के बाद किसी कार में असामान्य रूप से कम एक्सेलेरेशन दिखता है, तो न्यूनतम एक्सेलेरेशन सुनिश्चित करने के लिए MGU-K डिप्लॉयमेंट अपने आप चालू हो जाएगा। इसे बिना कोई स्पोर्टिंग फायदा दिए सुरक्षा पक्की करने के लिए बनाया गया है। प्रभावित कारों में पीछे आने वाले ड्राइवरों को सचेत करने के लिए पीछे और साइड की लाइटें फ्लैश करेंगी।
फॉर्मेशन लैप की शुरुआत में एनर्जी काउंटर रीसेट भी लागू किया गया है, ताकि पहले पहचानी गई सिस्टम की गड़बड़ी ठीक हो सके।
गीले मौसम की स्थितियां
* ड्राइवरों के फीडबैक के बाद इंटरमीडिएट टायरों के लिए टायर ब्लैंकेट का तापमान बढ़ाया गया है, ताकि गीली सतह पर शुरुआती ग्रिप बेहतर हो।
* गीली स्थितियों में ERS डिप्लॉयमेंट घटाया गया है, यानी कम टॉर्क और कम ग्रिप में कार पर बेहतर नियंत्रण।
* खराब मौसम में बेहतर दृश्यता के लिए रियर लाइट सिस्टम को सरल बनाया गया है।

आगे क्या
फॉर्मूला 1 की वापसी 1 से 3 मई को मायामी ग्रां प्री से होगी, जो सीजन का दूसरा स्प्रिंट वीकेंड है। यहीं नए नियमों की असली परीक्षा होगी। ये नियम "फ्लैट-आउट ड्राइविंग" लौटा पाते हैं या नहीं, और स्पून कर्व जैसा एक और हादसा रोक पाते हैं या नहीं, यही 2026 सीजन के बाकी हिस्से की दिशा तय करेगा।




