"हर कोई जानता था कि मैं मखाचेव से लड़ना चाहता था, लेकिन उस समय चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थीं।" कमारू उस्मान के इस कबूलनामे से UFC के भीतर चल रही पर्दे के पीछे की जोड़-तोड़ सामने आ गई है, जहां इस्लाम मखाचेव और इलिया टोपुरिया का मुकाबला कराने की कोशिश ने इस दिग्गज फाइटर से चुपचाप टाइटल शॉट छीन लिया। प्रमोशन जॉर्जियाई "मैटाडोर" और मखाचेव के बीच सुपर-फाइट कराने पर इतना केंद्रित हो गया कि बाकी सभी प्रतिद्वंद्वियों से जुड़ी बातचीत धीरे-धीरे ठंडी पड़ गई।

मखाचेव के साथ अपने प्रस्तावित मुकाबले के टूटने के अलावा उस्मान ने उस फैसले के बारे में भी खुलकर बात की, जो उन्होंने UFC के दागिस्तानी फाइटर से भिड़ाने के विचार को ठुकराने के बाद लिया।
उन्होंने बताया कि जब उनके आसपास की चर्चा खत्म हो गई, तो उनके पास कहीं और देखने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा। उस्मान ने कहा, "इसके बाद मैं डु प्लेसिस से लड़ने को राजी हो गया, क्योंकि कोई और विकल्प नहीं था।"
प्रायोजितइस तरह इस दिग्गज फाइटर ने पुष्टि की कि उनका अगला मुकाबला ड्रिकस डु प्लेसिस से होगा।
लेकिन जिस फाइट का सबको इंतजार था, यानी टोपुरिया बनाम मखाचेव, वह कभी हो नहीं पाई, और इसकी वजह को लेकर दोनों खेमों की कहानियां बिल्कुल अलग हैं। मखाचेव के खेमे का कहना है कि जॉर्जियाई चैंपियन ने अव्यावहारिक पर्स मांगा, जबकि टोपुरिया पलटकर आरोप लगाते हैं कि उनके प्रतिद्वंद्वी हाथ की चोट का हवाला देकर पीछे हट गए। दोनों के अलग-अलग दावे उन दो फाइटरों के बीच दिलचस्पी और बढ़ा देते हैं, जिनकी राहें फिलहाल जुदा हो चुकी हैं। क्या खेल जगत कभी इन दोनों चैंपियनों को आमने-सामने देख पाएगा, या यह मुकाबला हमेशा अधूरा ही रहेगा?




